ये है मां वैष्णों देवी के दरबार की कहानी

Tue, Oct 23, 2018 5:27 PM

बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर साल माता के दरबार मां वैष्णो देवी मंदिर पहुंचते हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार माता ने अपने भक्त श्रीधर को जब सभी गांववालों को भंडारा में बुलाने को कहा तो उसने इसमें अपने गुरु गोरखनाथ व उनके शिष्य भैरवनाथ को भी आमंत्रित किया। भंडारे के वक्त मां का सुमिरन करने पर मां कन्या के रूप में पहुंच गयीं और प्रसाद खिलाना शुरू कर दिया, जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। श्रीधर भी यह देखकर चकित रह गए थे।

भैरवनाथ इस दौरान मदिरा और मांस मांगने लगे। कन्या के समझाने पर वे उनके पीछे दौड़ने लगे। कन्या के रूप में मां भागती हुई त्रिकूट पर्वत पर पहुंच गयीं और वहां एक गुफा में उन्होंने 9 माह तक तपस्या की। बाहर हनुमान जी पहरा देते रहे। भैरवनाथ और हनुमान के बीच लंबा युद्ध चला। जब भैरवनाथ नहीं माने तो मां महाकाली के रूप में प्रकट हुईं भैरवनाथ का वध कर दिया। 

जहां भैरवनाथ का सिर गिरा, वह भैरवनाथ मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया। जहां मां ने भैरवनाथ का वध किया वह मां वैष्णो देवी के दरबार के रूप में जाना जाने लगा। कहा जाता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से यहां पूजा करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं मां जरूर पूरा करती हैं।