मूर्तिकारों से बिदा लेकर अब पण्डालों में जाएंगी माँ दुर्गा, अंतिम चरण में सजावट

Fri, Oct 4, 2019 10:56 PM

मऊ : 'मिट्टी की बनी मां दुर्गा की प्रतिमा, मिट्टी का ही बना गहना... फिर भी क्या कहना'. मूर्तिकारों द्वारा पिछले कई महीनों से की गई मेहनत अब साकार रूप ले चुकी है. दुर्गा प्रतिमाओं की सजावट व श्रृंगार अब अंतिम चरण में हो रही है.

बता दें कि जनपद मऊ में विभिन्न स्थानों पर दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है. पूजा समितियों ने कई सप्ताह पहले ही दुर्गा प्रतिमाओं के लिए एडवांस बुकिंग करा ली है. जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में मूर्तिकारों द्वारा प्रतिमाएं बनाई गई हैं. रासायनिक रंगों से होने वाले नुक़सान को देखते हुए मूर्तिकारों ने केमिकल युक्त रंगों के प्रयोग से दूरी बना ली है. मूर्तिकारों द्वारा प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया गया है.


नगर क्षेत्र के भीटी रोड स्थित रूपचन्द्र गौतम पिछले 3-4 महीने से माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने में लगे हुए हैं. उनके इस काम में उनके दो बेटे व चार अन्य कारीगर भी साथ दे रहे हैं. जो दिन-रात एक कर मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं.


मूर्तिकार रूपचंद्र गौतम ने बताया कि वह 1988 से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने यह कला कलकत्ता में सीखी थी. इस बार शारदीय नवरात्र की मूर्तियों के लिए वह पिछले 3-4 महीने से तैयारी में लगे हैं. मूर्तियों का निर्माण पूरा हो चुका है जिसे अब अंतिम रुप दिया जा रहा है.  सप्तमी को सभी मूर्तियां यहाँ से चली जाएंगी. उन्होंने बताया कि हमारे यहां कुल 29 मूर्तियों का निर्माण किया गया है. इस कार्य में मिट्टी, सुतरी, पुआल, बांस, कील, जूट, रंग आदि का प्रयोग किया जाता है. आयल पेंट व रसायनिक रंगों का प्रयोग नहीं किया गया है. इनके स्थान पर वॉटर कलर व प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है.