तीन दशक बाद भी यहां खत्म होगा या नहीं कांग्रेस का सूखा?

Sun, Feb 10, 2019 5:34 PM

कांग्रेस का महासचिव बनने और पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोकसभा चुनाव के लिए कमान संभालने के बाद प्रियंका गांधी के सामने चुनौतियां बड़ी हैं। इनमें से एक चुनौती देवरिया में इस बार लोकसभा चुनाव जीतने की भी है। देवरिया से कांग्रेस के खाते में चार बार लोकसभा सीट गई हैं, मगर 1984 के बाद से यहां कांग्रेस अपना खाता नहीं खोल पाई है।

गौरतलब है कि देवरिया की लोकसभा सीट 1946 में अस्तित्व में आई थी। सबसे पहले 1957 के जो आम चुनाव हुए थे, उसमें रामजी वर्मा सांसद बने थे। वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के थे। उसके बाद से लगातार तीन बार 1971 तक कांग्रेस के विश्वनाथ राय यहां से जीतते रहे थे। अंतिम बार साल 1984 में कांग्रेस के राजमंगल पांडे को यहां से विजय मिली थी, पर उसके बाद से कांग्रेस इस सीट पर चुनाव नहीं जीत पाई है।

फिलहाल तो भाजपा के पूर्व मंत्री कलराज मिश्र यहां से सांसद बने हुए हैं, लेकिन पार्टी के अंदर ही कलराज के अलावा देवेंद्र प्रताप सिंह, शशांक मणि और शलभ मणि भी यहां से अपनी दावेदारी ठोंकते हुए नजर आ रहे हैं। कांग्रेस की तरफ से भी पूर्व विधायक और कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह यहां से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

वे बार-बार देवरिया में देखे भी जा रहे हैं। हालांकि सपा-बसपा के गठबंधन के बाद यहां का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है। सपा के पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर तिवारी के भी मीडिया ने यहां से दावेदारी दिखाने की खबरें सामने आ रही हैं। प्रियंका गांधी के महासचिव पद की कमान संभालने के बाद क्या देवरिया में कांग्रेस का सूखा खत्म हो पाता है, इसका जवाब तो अब लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ही मिल पाएगा।