सीएए , एनआरसी काला कानून, देश को भटका रही है भाजपा: पूर्व विधायक उमेश चन्द पांडेय

Thu, Feb 6, 2020 10:14 PM

मऊ

नागरिकता संशोधन कानून के लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और हंगामे की ख़बरें बनी हुई हैं। भाजपा के विपक्षी दल इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। विरोध करने वाले नेता सीएए और एनआरसी को काला कानून बताते हैं, लेकिन जब मीडिया सवाल करता है एनआरसी और सीएए पर तो नेता सही जानकारी नहीं दे पाते हैं और बाद में जवाब देने की बात करते हैं। हम बात कर रहे हैं, उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की जहाँ बसपा के पूर्व विधायक उमेश चन्द पाण्डेय की जो पिछले 20 जनवरी बसपा को छोड़कर सपा में शामिल हो गये। पाण्डेय जिले की मधुबन विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके हैं।

 

सपा में शामिल होकर बुधवार को जिले में प्रथम आगमन पर प्रेस वार्ता किया जिसमें सीएए और एनआरसी को काला कानून बताया और सवाल उठाया की एनआरसी के तहत देश के पूर्व राष्ट्रपतियों तक का नाम सूची से बाहर कर दिया गया है। लेकिन मीडिया के सवाल पूछने पर राष्ट्रपतियों के नाम नहीं बता पाये। साथ ही प्रदेश की कानून व्यवस्था को पूरी तरह फ्लॉप बताया।

 

पूर्व विधायक के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद पहली बार जनपद में आने पर उनका समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने फूलमाला पहना कर जमकर स्वागत किया। पहली बार जनपद में पहुंचने पर पूर्व विधायक ने समाजवादी पार्टी को मजबूत करने का संकल्प लिया।

 

बसपा को छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल पूर्व विधायक उमेश चन्द पान्डेय ने कहा कहा कि उन्होंने बसपा में 19 वर्षों तक काम किया है। 10 वर्षों तक जिले के मधुबन विधानसभा से विधायक रहे और 9 वर्षों तक पार्टी में कार्यकर्ता के रूप में काम किया। लेकिन अब बहुजन समाज पार्टी बाबा साहब के मुद्दों से भटक गयी है। नीतियों से भटकने और चाटुकार नेताओं के आने से पार्टी की नीतियां बदल गयी हैं, जिससे आहत होकर पार्टी छोड़कर अब वह अखिलेश यादव की पार्टी में शामिल होकर उनकी नीतियों को आगे बढ़ाने का काम करेंगे और 2022 में समाजवादी पार्टी की सरकार को बनवाने का काम करेंगे।

 

पूर्व विधायक उमेश चन्द पाण्डेय ने सीएए और एनआरसी को काला कानून बता दिया। कहा कि देश में जब महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे हावी होने लगते हैं तब भाजपा इन मुद्दों को छोड़कर नया मुद्दा लाकर देश की जनता का ध्यान भटकाने का काम करती है। पूर्व विधायक ने कहा कि धर्म के आधार पर सीएए को क्यों लाया जा रहा है जब इसको लाया जा रहा है तो इसमें सबको शामिल किया जाना चाहिए। इस सरकार ने देश के नाम लड़ने वाले आर्मी के जवानों को एनआरसी के तहत बाहर का रास्ता दिखाने काम किया है तो वहीं देश के पूर्व राष्ट्रपतियों के नाम को भी एनआरसी के तहत बाहर कर दिया।

 

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व विधायक ने पूर्व राष्ट्रपतियों के नाम के बाहर करने की बात को जोर-शोर से उठाने का काम किया तो मीडिया ने पूछा कि उनके नाम को बताएं जिन्हें एनआरसी के तहत बाहर किया गया है तो पूर्व विधायक को उनका नाम तक नहीं पता था। सवाल ये है कि भाजपा के  विपक्षी पार्टियों के कुछ नेताओं को एनआरसी और सीएए के बारे में सही जानकारी नहीं है लेकिन वो उसका विरोध कर रहे हैं।