भारत और नेपाल के संबंध सदियों पुराने और हृदय के संबंध है--प्रो टी एन सिंह

Mon, Jul 27, 2020 9:20 PM


वाराणसी। आज दिनांक २७ जुलाई २०२० को पंडित  दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ एवं राष्ट्रीय सेवा योजना,महत्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के संयुक्त तत्वाधान में भारत-नेपाल राष्ट्र सहस्तित्व: पण्डित दीन दयाल उपाध्याय के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का ऑनलाइन आयोजन किया गया।

विषय प्रवर्तन करते हुए शोध पीठ के सह समन्वयक डॉ कृष्ण कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भू सांस्कृतिक संदर्भों में सामाजिक सम्बन्ध आर्थिक विकास में सहभागिता तथा समानता के लिए पण्डित दीन दयाल उपाध्याय के विचार केंद्र में समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण का विचार आज भारत नेपाल राष्ट्र के सहस्तित्व के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। प्राकृतिक आपदा दोनों ही राष्ट्रों में बारम्बार जन हानी का कारक है जो करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का दूरस्थ भौगोलिक क्षेत्रों तक पहुंच और प्रसार लोककल्याण के लिए संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं।  आयुर्वेद, सोवा रिगपा चिकित्सा पद्धति तथा योग एक जीवनशैली का अभिन्न एवं एकरूप धरोहर हैं जो भारत नेपाल के सहस्तित्व में समाहित है। वर्तमान वैश्विक संक्रामक महामारी से मानवजाति के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न उत्पन्न हो रहा। आधुनिक चिकित्सा के तमाम उपलब्धियां भी लाखों लोगों के असमय काल कलवित होने से  रोक पा रहीं ।


अंतरराष्ट्रीय वेबीनार के मुख्य अतिथि नेपाल सरकार के पूर्व उप वित्त मंत्री श्री उदय शमशेर राना जी ने कहा कि भारत नेपाल की जनता की भावना का सम्मान हो एवं दोनों देशों के करोड़ों नागरिक एक दूसरे देश में पीढ़ियों से  निवास एवं रोजगार में अपना योगदान करते आए हैं। अतः किसी विषय पर मीडिया एवं राष्ट्रीय प्रतिष्ठान को संयम एवं वास्तविक स्थितियों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधि अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए भारत विरोधी माहौल बना युवाओं को भ्रमित कर राष्ट्रवाद का प्रयोग कर रहे हैं जो अनुचित है।

अंतरराष्ट्रीय वबिनार  के सम्मानित अतिथि, संसद के सदस्य,नेपाली कांग्रेस डॉ अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि आज भारत नेपाल को तकनीकी , चिकित्सा तथा  औषधि  के लिए संयुक्त शोध की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने भारत एवं नेपाल के संयुक्त प्रयास क्षेत्रीय विषमता दूर करने और समावेशन के लिए आवश्यक हैं।

अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के मुख्य वक्ता, एमेरिटस प्रोफेसर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, इंडो-नेपाल संबंध के विशेषज्ञ, प्रोफेसर एस.डी. मुनी ने कहा कि भारत नेपाल के सम्बन्ध मुख्यत: क्षेत्रीय शक्ति संतुलन (भारत, नेपाल, तिब्बत चीन द्वारा अनाधिकृत कब्जा) घरेलू राजनीति, वैश्विक शक्तियों का हस्तक्षेप तथा भारत की पूर्ववर्ती सरकार की विदेश नीति का ब्रिलियंट टू ब्लंडर वाली व्यवहार सम्बन्धों को प्रभावित करता है। प्रो मुनि ने पण्डित दीन दयाल उपाध्याय के तत्कालीन विदेश मंत्रालय को लिखे पत्र को दोनों देशों के बीच मधुर सम्बन्ध स्थापित करने में सहायक बताया।

यूजीसी नोडल अधिकारी प्रो निरंजन सहाय ने कहा कि शिक्षा एक मानव समाज में वैचारिक तथा बौद्धिक विकास में विज्ञान तथा वैज्ञानिक  तथ्यों का विश्लेषण वैश्विक विकास मानकों के अनुरूप हो तथा रोजगार एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य तथा क्रियान्वयन प्रणाली का उत्तरदायित्व स्थापित कर लोककल्याण सुनिश्चित किया जा सके। 

अंतरराष्ट्रीय वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर टी.एन.सिंह ने कहा कि भारत नेपाल सम्बन्ध हृदय के सम्बन्ध हैं एवं सांस्कृतिक एकता विषम भौगोलिक आर्थिक तथा राजनीतिक समस्याओं के निराकरण में सक्षम हैं। संगोष्ठी का संचालन आयोजन सचिव डॉ. पारिजात सौरभ  एवम संयोजक डॉ के के सिंह ने संयुक्त रूप से किया ,अतिथियों का औपचारिक स्वागत प्रो निरंजन सहाय और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुंवर पुष्पेंद्र प्रताप सिंह द्वारा किया गया।


 डॉ. चंद्रशेखर सिंह, डॉ. अवधेश सिंह, डॉ. मोनिका सरोज, डॉ राकेश तिवारी, डॉ.  सिंह, डॉ. शशिकांत वर्मा, डॉ. नंदिनी सिंह, डॉ. सतीश कुशवाहा, डॉ. अर्चना गोस्वामी, डॉ शैलेश, डॉ. सुमन ओझा, डॉ. उमेश कुमार सिंह ,डॉ. अविनाश कुमार सिंह, डॉ. रमेश कुमार मिश्र,डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. संदीप वर्मा, डॉ. कामिनी वर्मा के साथ ही वाराणसी, चन्दौली, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी, स्वयं सेवक हर्ष राय ,ऋषिकांत, आदि एवं स्वयं सेविकाएं नम्रता मिश्रा, अभिलाषा तिवारी, प्रीति, रिद्घिमा आदि चार सौ से अधिक प्रतिभागी उपस्थित थे।