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मकान निर्माण कराने वाले के लिए खुश खबरी, जाने कितने रुपये प्रति टन बिक रहा है सरिया।

आम जनमानस जिस चीज को लेकर भाजपा सरकार से सबसे ज्यादा नाराज दिखता है वह है महँगाई! क्योंकि महँगाई की मार सभी जाति-वर्ग की जनता को झेलनी पड़ती है। दुनियाभर में गेहूँ के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से का उत्पादन करने वाले देश रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के चलते दुनिया में गेहूँ की कमी हो गई। गेहूँ की कमी को पूरा करने के लिए इस वर्ष भारत ने अपनी क्षमता का सर्वाधिक गेहूँ निर्यात किया जिसकी वजह से भारत में गेहूँ की कीमत तेजी से बढ़ने लगी। गेहूँ की कीमत को स्थिर करने के लिए सरकार ने गेहूँ के निर्यात पर रोक लगा दी जिसके बाद गेहूँ की कीमत स्थिर हो गई है।

गेहूँ की तरह ही देश में लौह सामग्री की कीमत भी तेजी से बढ़ रही थी जिसको स्थिर करने के लिए सरकार ने लौह सामग्री के निर्यात पर भी रोक लगा दी। सरकार के इस निर्णय के बाद बाज़ार में लौह सामग्री का भरपूर स्टाक जमा हो जाने तथा गर्मी की वजह से लोहे के सामानों की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है; लोहे की कीमत में लगातार हो रही गिरावट का सबसे अधिक लाभ निर्माण उद्योग जगत को हो रहा है।

भवन निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सरिया की कीमतों में एक हफ्ते के भीतर 2-4 हजार रुपए प्रति टन की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह में 74000 रुपये प्रति टन के हिसाब से सरिया बिक रहा था लेकिन अब सरिया 70-72 हजार रुपए प्रति टन के हिसाब से बिक रहा है। प्रति टन 100000 रुपये से भी अधिक कीमत पर बिकने वाले बड़े ब्रांड के लोहे के सामान भी आज 93-94 हजार रुपए प्रति टन के हिसाब से बिक रहे हैं।

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